• पत्राचार कार्यालय
    अजगरा तारगांव चहनिया टांडा कला चंदौली-221115 उत्तर प्रदेश
  • संपादकीय कार्यालय
    भीटारी, लोहता, 221107 वाराणसी उत्तर प्रदेश
  • 9454193605, 7007988527
  • Trending लोकतंत्र का चौथा स्तंभ: कलम की ताकत, समाज का विश्वास और हमारी जिम्मेदारी
  • GYAN SHANKAR TRIPATHI - 14 Mar 2026

संपादक-धनंजय ओझा

​एक सशक्त और स्वस्थ लोकतंत्र में पत्रकारिता को 'चौथा स्तंभ' का दर्जा दिया गया है। कलमकारों (पत्रकारों) के कंधों पर समाज को आईना दिखाने, सत्ता से सवाल करने और आम इंसान की दबी हुई आवाज बनने की एक बेहद पवित्र जिम्मेदारी होती है। लेकिन, एक सवाल जो आज हर जागरूक नागरिक के मन में उठ रहा है— क्या आज की पत्रकारिता अपने इस मूल धर्म का पूरी निष्ठा से पालन कर रही है?

जब जवाबदेही बन जाए व्यवस्था का हिस्सा

इतिहास गवाह है कि जब-जब कलम ने अपनी निष्पक्षता छोड़ी है और व्यवस्था की कमियों को उजागर करने के बजाय, उसकी कमियों पर पर्दा डालने का काम किया है, तब-तब प्रशासनिक व्यवस्थाएं सुधरने के बजाय बद से बदतर हुई हैं। इस चिंताजनक स्थिति की झलक हम अपने आस-पास की प्रशासनिक इकाइयों, जैसे चहनिया विकासखंड और इसके जैसी अन्य जगहों की व्यवस्थाओं में साफ महसूस कर सकते हैं।

​जब एक कलमकार बिगड़ी हुई व्यवस्था पर सवाल उठाने और उसे सुधारने के लिए लिखने के बजाय, उसी बिगड़ी व्यवस्था का मूक समर्थक या हिस्सा बन जाता है, तो वहां से आम इंसान की परेशानी का नया अध्याय शुरू होता है।

टूटता हुआ सामाजिक विश्वास

एक आम नागरिक हमेशा न्याय, सुधार और सच की उम्मीद में पत्रकारिता की ओर देखता है। उसके लिए अखबार का पन्ना या न्यूज का माइक उसकी अपनी ताकत होती है। लेकिन जब उसे लगता है कि उसकी परेशानी उठाने वाले हाथ ही उस अव्यवस्था के साथ मिल गए हैं, तो उसका भरोसा टूट जाता है। आज अगर आम इंसान के मन में कलमकारों के प्रति अविश्वास पैदा हो रहा है, तो यह पूरे पत्रकारिता जगत के लिए एक गंभीर आत्ममंथन का विषय है।

हमें 'चौथा स्तंभ' क्यों कहा जाता है?

आज वक्त आ गया है कि हम याद करें कि हमें लोकतंत्र का चौथा स्तंभ क्यों माना गया है:

  • हम जनता की आवाज हैं: हमारा काम किसी की स्तुति करना नहीं, बल्कि सोए हुए तंत्र को जगाना है।
  • हमारी ताकत हमारी निष्पक्षता है: समाज में बदलाव तभी आता है जब कलम बिना किसी डर या स्वार्थ के चलती है।
  • हमारा धर्म सच्चाई है: व्यवस्थाओं की कमियों को सामने लाना कोई विरोध नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारा सबसे बड़ा योगदान है।

पत्रकारिता कोई पेशा नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। आइए, अपनी कलम की उस खोई हुई धार और समाज के उस टूटते हुए विश्वास को फिर से कायम करें। क्योंकि जिस दिन कलम अपना सही धर्म निभाने लगेगी, उस दिन चहनिया हो या देश का कोई भी अन्य कोना, कोई भी व्यवस्था बदहाल नहीं रह सकेगी। समाज को आज भी अपने निष्पक्ष और निडर कलमकारों से बहुत उम्मीदें हैं। आइए, उन उम्मीदों पर खरे उतरें।

Like This Post? Related Posts
Recent Comments
  • Vidya Bhushan Singh / 15 Mar 2026 Right
  • Rajesh Gupta patrkar / 14 Mar 2026 Nsd times best
Leave a Comment