चंदौली। जनपद के पिपरी गांव में आयोजित सप्त दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन धनुष भंजन प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहा। कथाव्यास पंडित शक्ति तिवारी जी ने भगवान श्रीराम के धनुष भंजन और माता सीता के जयमाल प्रसंग का अत्यंत मनोरम एवं भावपूर्ण वर्णन किया, जिसे सुनकर श्रोतागण भक्ति रस में डूब गए।

कथाव्यास पंडित शक्ति तिवारी जी ने धनुष भंजन प्रसंग की व्याख्या करते हुए कहा कि जिस कार्य को दस हजार राजा मिलकर भी नहीं कर सके, उस कार्य को भगवान श्रीराम ने सहजता से कर दिखाया। इसके पीछे एक गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा है। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम धनुष तोड़ने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि धनुष यज्ञ देखने के लिए आए थे, जबकि वहां उपस्थित राजा धनुष तोड़कर सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त करने की भावना लेकर पहुंचे थे। यही कारण था कि अहंकार और सम्मान की लालसा लेकर आए राजा असफल रहे, जबकि भगवान श्रीराम ने सहज भाव से असंभव दिखने वाले कार्य को पूरा कर दिया।

उन्होंने श्रद्धालुओं को संदेश देते हुए कहा कि मनुष्य जब किसी कार्य को केवल सम्मान और प्रतिष्ठा पाने की लालसा से करता है, तो उसे कई बार अपमान का सामना करना पड़ता है। इसलिए जीवन में अहंकार और दिखावे के बजाय विनम्रता, समर्पण और मर्यादा का भाव रखना चाहिए। इसके पश्चात मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा प्राप्त करने के बाद ही शिव धनुष का भंजन किया। कथाव्यास ने इस प्रसंग के माध्यम से गुरु की आज्ञा, मर्यादा और संस्कारों का महत्व भी समझाया। इसके बाद माता सीता के जयमाल प्रसंग का अत्यंत सुंदर और भावपूर्ण वर्णन किया गया। इस प्रसंग के दौरान श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा कथा पंडाल जय सियाराम तथा हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम में आयोजक राकेश तिवारी, परमानंद तिवारी, वेद प्रकाश तिवारी, राकेश दुबे, टुनटुन सिंह, शैलेश तिवारी सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
इस धार्मिक आयोजन के अवसर पर निष्पक्ष धारा के संपादक धनंजय ओझा, कार्यालय प्रभारी अमित कुमार ओझा तथा पत्रकार साथी मनोज मिश्रा एवं अंजनी मिश्रा की भी उपस्थिति रही। सप्त दिवसीय श्रीराम कथा को लेकर गांव एवं आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। कथा के दौरान भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक संदेशों से पूरा वातावरण राममय बना हुआ है।