लेखपालों की कथित मिलीभगत से सरकारी भूमि पर कब्जे और खरीद-फरोख्त के आरोप, जांच और कार्रवाई पर टिकी निगाहें
उन्नाव। जिले में सरकारी भूमि की सुरक्षा और कथित अवैध कब्जों को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं। शाहिद मिर्जा और साबिर मिर्जा पर ग्राम समाज की जमीन पर आलीशान इमारत खड़ी करने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इस मामले में राजस्व विभाग के कुछ लेखपालों की कथित भूमिका और मिलीभगत को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले को लेकर सवाल उठ रहा है कि यदि सरकारी भूमि पर कब्जा कर उसका इस्तेमाल निर्माण या खरीद-फरोख्त के लिए किया गया है, तो संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? सरकारी जमीन की निगरानी और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, उनकी भूमिका की भी निष्पक्ष जांच किए जाने की मांग उठ रही है।
सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों की हो निष्पक्ष जांच
आरोप है कि सरकारी भूमि पर कब्जे और उससे जुड़े कथित लेन-देन के जरिए आर्थिक लाभ उठाया गया। इस संबंध में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि कहीं ऐसी गतिविधियों से सरकारी राजस्व को नुकसान तो नहीं पहुंचा। यदि जांच में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा, नियमों के उल्लंघन या अधिकारियों की मिलीभगत के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
भाजपा सरकार में भूमाफिया को संरक्षण मिलने के आरोपों पर सवाल
इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए जा रहे हैं। सवाल यह है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी भूमि पर कब्जे की कथित गतिविधियां किसके संरक्षण में चल रही थीं? क्या संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई या फिर शिकायतों और अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया? इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
प्रशासन से मांग—जमीन के अभिलेखों और निर्माण की हो जांच
मामले में जिलाधिकारी और संबंधित राजस्व अधिकारियों से मांग की जा सकती है कि ग्राम समाज की जमीन के राजस्व अभिलेखों, निर्माण की वैधता, भूमि के स्वामित्व और कथित खरीद-फरोख्त की जांच कराई जाए। साथ ही, यदि किसी लेखपाल या अन्य अधिकारी की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब देखना होगा कि जांच होगी या मामला फाइलों तक सीमित रह जाएगा। शाहिद मिर्जा और साबिर मिर्जा पर लगाए गए आरोपों को लेकर प्रशासन का रुख क्या रहता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल, पूरे मामले में निष्पक्ष जांच, तथ्यों के सत्यापन और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की आवश्यकता है। संबंधित पक्षों का जवाब और प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने आना बाकी है।