वाराणसी। हरहुआ स्थित राजेश्वरी महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर रंगारंग एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्रबंध निदेशक एवं साहित्यकार डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. राघवेन्द्र नारायण सिंह ने कहा कि शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूप नारी शक्ति के विभिन्न रूपों के प्रतीक हैं। शक्ति एक होते हुए भी अनेक रूपों में प्रकट होती है। उन्होंने कहा कि शुंभ, निशुंभ और महिषासुर जैसे दुष्ट प्रवृत्तियों के प्रतीक आज भी समाज में मौजूद हैं, जिनका सामना करने के लिए नारी को अपने भीतर की शक्ति को पहचानना होगा। नारी को अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपने चरित्रबल और आत्मविश्वास को मजबूत करना आवश्यक है।

उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए नारी के आत्मसम्मान, विवेक और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय की छात्राओं ने मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का मनमोहक मंचन किया। महिषासुर वध की शानदार प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। वहीं, देवी गीतों और भक्तिगीतों की प्रस्तुति से पूरा सभागार भक्तिमय हो उठा। छात्राओं की आकर्षक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम में डॉ. डीके तिवारी, ज्योति गुप्ता, सरोजा देवी, शालू गिरि, इकबाल अहमद एवं सुनीता त्रिपाठी सहित अन्य लोग प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सुनीता कन्नौजिया ने किया। संयोजन ज्योति सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन महाविद्यालय के उपनिदेशक अंशुमान सिंह ने किया। इस आयोजन के माध्यम से छात्राओं ने भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और नारी शक्ति के महत्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।