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  • Trending अजगरा के शिवालय पर आस्था और ममता का अद्भुत संगम, माताओं ने पुत्रों की दीर्घायु के लिए रखा जिउतिया व्रत
  • DHANANJAY OJHA - 04 Oct 2026

चंदौली (चहनिया)। चंदौली जनपद के चहनिया विकासखंड अंतर्गत अजगरा ग्राम सभा स्थित प्राचीन शिवालय पर जिउतिया पर्व श्रद्धा, भक्ति और पारंपरिक आस्था के साथ हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। पर्व को लेकर सुबह से ही गांव की माताओं और बहनों में उत्साह देखने को मिला। शाम होते-होते शिवालय परिसर श्रद्धालु महिलाओं की मौजूदगी से भक्तिमय वातावरण में बदल गया।


जिउतिया पर्व माताओं के लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि ममता, त्याग और संतान के प्रति अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के साथ बड़ी संख्या में माताओं ने अपने पुत्रों की सुख-समृद्धि, स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना करते हुए कठिन व्रत का संकल्प लिया।


शाम करीब चार बजे से छह बजे तक माताओं और बहनों ने शिवालय परिसर में एकत्र होकर जिउतिया माता की पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने विधि-विधान से पूजन कर अपने पुत्रों की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। पूजा के दौरान भक्ति गीतों और धार्मिक जयकारों से पूरा शिवालय परिसर गूंज उठा।


व्रत रखने वाली महिलाओं के चेहरों पर थकान से अधिक ममता और आस्था की चमक दिखाई दे रही थी। कठिन निर्जला व्रत के बावजूद माताओं का विश्वास अडिग रहा। उनका कहना था कि संतान की सलामती और लंबी उम्र के लिए किया गया यह त्याग उन्हें शक्ति देता है।

ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि जिउतिया पर्व हमारी लोक परंपरा और सनातन संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। इस दिन मां अपने बच्चों की खुशहाली के लिए स्वयं कष्ट सहते हुए व्रत रखती है। यही त्याग मां के प्रेम को सबसे अलग और महान बनाता है।

पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। बुजुर्ग महिलाओं ने नई पीढ़ी की महिलाओं और बच्चियों को जिउतिया पर्व की धार्मिक मान्यताओं एवं परंपराओं के बारे में बताया। इससे शिवालय परिसर में धार्मिक आस्था के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा के संरक्षण का संदेश भी देखने को मिला।


अजगरा शिवालय पर मनाए गए जिउतिया पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति में मां और संतान का रिश्ता केवल खून का रिश्ता नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, दुआ और असीम ममता का रिश्ता है। मां अपने संतान के सुख के लिए स्वयं कठिनाइयां सह लेती है, लेकिन उसकी सलामती की कामना कभी नहीं छोड़ती।


शाम के समय शिवालय में जुटी महिलाओं की भीड़, पूजा की थाली, दीपक की रोशनी और जिउतिया माता के जयकारों ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। अजगरा का शिवालय मानो उस समय मातृशक्ति की श्रद्धा और आस्था का साक्षी बन गया।

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