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  • Trending सीएमओ साहब जवाब दीजिए: 91 गांवों की उम्मीदों पर चोट, चहनिया में कब मिलेगा असली CHC का लाभ?
  • DHANANJAY OJHA - 08 Jun 2026
  • क्या चहनिया की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का अधिकार नहीं?
    माननीय मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) महोदय, चंदौली,

यह सवाल आज चहनिया ब्लॉक का हर वह व्यक्ति पूछ रहा है, जिसे बीमारी के समय बेहतर इलाज की उम्मीद होती है। आखिर ऐसा क्यों है कि 91 ग्राम सभाओं की आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला एकमात्र स्वास्थ्य केंद्र आज भी अपनी बदहाल व्यवस्था से जूझ रहा है?

कागजों पर चहनिया का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) अब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के रूप में संचालित दिखाया जा रहा है, लेकिन जब वास्तविकता की जमीन पर उतरकर देखा जाता है तो वहां की व्यवस्था आज भी एक साधारण पीएचसी जैसी ही नजर आती है। यदि यह वास्तव में सीएचसी है तो फिर मरीजों को छोटी-छोटी चिकित्सीय जरूरतों के लिए रेफर क्यों किया जा रहा है? आखिर किस कमी के कारण यहां आने वाले मरीजों को इलाज के बजाय ट्रांसफर की पर्ची थमा दी जाती है?

रिपोर्टिंग के दौरान मैंने कई बार देखा है कि चहनिया सीएचसी से मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है। हर बार मन में एक ही सवाल उठता है कि यदि यहां सीएचसी की सुविधाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को भटकने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? इसका जवाब स्वास्थ्य विभाग और उसके जिम्मेदार अधिकारियों को देना चाहिए।

कुछ दिनों पहले कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में यह खबर प्रकाशित हुई कि चहनिया सीएचसी में 30 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है। इस खबर की सच्चाई जानने के लिए जब मैंने स्वयं चहनिया स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी से बातचीत की, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से बताया कि ऐसी कोई योजना धरातल पर नहीं चल रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि केंद्र कागजों पर भले ही सीएचसी के रूप में दर्ज हो, लेकिन सुविधाएं अभी भी पीएचसी स्तर की ही हैं।

अब सवाल यह है कि इस भ्रम और प्रशासनिक विसंगति का खामियाजा कौन भुगत रहा है?जवाब सीधा है चहनिया का आम नागरिक। वह किसान जो दिनभर खेत में मेहनत करता है, वह मजदूर जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष करता है, वह बुजुर्ग जो इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचता है, और वह मां जो अपने बीमार बच्चे को लेकर स्वास्थ्य केंद्र के चक्कर काटती है — सबसे अधिक पीड़ा इन्हीं लोगों को झेलनी पड़ रही है। सरकार लगातार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रही है। प्रदेश के मंत्री और अधिकारी स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की बात कर रहे हैं। ऐसे में यह समझ से परे है कि चहनिया जैसे बड़े ब्लॉक की जनता को आज भी पूर्ण विकसित सीएचसी की सुविधाएं क्यों नहीं मिल पा रही हैं।

हम पत्रकार हैं। जब कोई आम आदमी अपनी पीड़ा, अपनी बेबसी और अपने संघर्ष की कहानी सुनाता है, तो केवल खबर नहीं बनती, बल्कि समाज और व्यवस्था से सवाल भी खड़े होते हैं। हमारी कलम का उद्देश्य किसी की आलोचना करना नहीं, बल्कि जनता की आवाज को जिम्मेदार लोगों तक पहुंचाना है।

इसलिए, माननीय सीएमओ महोदय, आपसे विनम्र निवेदन है कि चहनिया क्षेत्र की इस गंभीर समस्या को केवल एक प्रशासनिक फाइल का विषय न समझें। यह 91 ग्राम सभाओं के लाखों लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ा प्रश्न है। यदि वास्तव में चहनिया को सीएचसी का दर्जा दिया गया है, तो वहां सीएचसी स्तर की सभी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। यदि 30 बेड के अस्पताल की योजना है, तो उसकी स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। और यदि कोई बाधा है, तो उसे दूर करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

चहनिया की जनता किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही, बल्कि अपने अधिकार की मांग कर रही है — समय पर और समुचित इलाज का अधिकार। उम्मीद है कि आप इस पीड़ा को समझेंगे और चहनिया के लोगों को एक बेहतर, सुसज्जित और पूर्ण विकसित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध कराने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई करेंगे। क्योंकि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि कई बार जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बन जाती है।

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