- आचार्य शांतनु महाराज ने सुनाया भावपूर्ण प्रसंग
- राम–सीता विवाह से लेकर वनवास तक की कथा का वर्णन
- श्रद्धालु हुए मंत्रमुग्ध, भक्ति में डूबा पूरा परिसर
- धर्म ग्रंथों के महत्व पर दिया गहन संदेश
बूढ़ेनाथ महादेव मंदिर में चल रही श्री राम कथा के पांचवें दिन कथा वाचक आचार्य शांतनु महाराज ने अपने प्रवचन से श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। उन्होंने रामायण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि “जिस वृक्ष की जड़ जितनी गहरी होती है, उसका तना उतना ही मजबूत होता है और वह सदियों तक फल व छाया देता है।

ठीक उसी प्रकार रामायण रूपी कल्पवृक्ष की जड़ अत्यंत गहरी और तना अत्यंत सुदृढ़ है, जिससे मानव समाज युगों-युगों तक लाभान्वित होता रहेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि हम सभी अत्यंत भाग्यशाली हैं कि हमें रामायण, गीता, महाभारत और अठारह पुराण जैसे महान धर्म ग्रंथों के साथ जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो रहा है। ये ग्रंथ न केवल जीवन का मार्गदर्शन करते हैं, बल्कि हमें धर्म, मर्यादा और संस्कारों का बोध भी कराते हैं।

कथा के दौरान आचार्य ने भगवान श्रीराम और माता सीता के विवाह का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। इसके पश्चात अयोध्या आगमन और फिर परिस्थितियोंवश श्रीराम, लक्ष्मण एवं माता सीता के 14 वर्ष के वनवास जाने का प्रसंग सुनाया। इस मार्मिक कथा को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा वातावरण भक्ति रस में सराबोर हो गया।

कार्यक्रम के दौरान परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, जो कथा के प्रत्येक प्रसंग को बड़े ध्यान और श्रद्धा के साथ सुनते रहे। कथा समाप्ति पर श्रद्धालुओं ने आचार्य जी के विचारों की सराहना करते हुए धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।