सीता विदाई प्रसंग पर भावुक हुए श्रोता, कथा स्थल पर छलके आंसू
गाजीपुर | गाजीपुर जनपद के सैदपुर क्षेत्र के बूढ़ेनाथ महादेव मे आयोजित श्री राम कथा के चौथे दिन का वातावरण अत्यंत भावुक और भक्तिमय रहा।
प्रख्यात कथावाचक आचार्य शांतनु जी महाराज ने श्रीराम विवाह और माता सीता की विदाई के मार्मिक प्रसंग का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पूरा पंडाल भावनाओं से भर उठा। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि इस संसार में यदि कोई सबसे पवित्र रिश्ता है, तो वह पिता और पुत्री का होता है।

आचार्य ने लोकभाषा में भाव व्यक्त करते हुए कहा— “ई त बेटी नाहि हई, ई त गंगाजल हई हो, ई त पवित्र तुलसीदल हई हो”।

उनके इस कथन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई तक स्पर्श किया। उन्होंने समझाया कि बेटी केवल संतान नहीं होती, बल्कि वह घर की पवित्रता, संस्कार और प्रेम की जीवंत प्रतीक होती है। जैसे ही कथा में माता सीता की विदाई का प्रसंग आया, आचार्य शांतनु जी महाराज स्वयं भावुक हो उठे। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े, जिसे देखकर श्रोता भी अपने आंसू नहीं रोक सके। पूरे कथा स्थल पर एक गहन संवेदनात्मक माहौल बन गया, जहां हर कोई इस पवित्र प्रसंग में डूबा नजर आया।

इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथा का रसपान करते हुए भगवान श्रीराम और माता सीता के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। कथा स्थल पर भक्ति, भाव और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने सभी के मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
