Reporter-Shailendra Dubey-Kerakat,Jaunpur
जौनपुर जिले के केराकत तहसील अंतर्गत ग्राम सभा सोहनी की बदहाल सड़कें आज विकास के दावों की पोल खोल रही हैं। पिछले 10 वर्षों से मरम्मत की राह तकती ये सड़कें अब सड़क कम और हादसों का टापू ज्यादा नजर आती हैं। आलम यह है कि यहाँ का आम जनमानस, विशेषकर बूढ़े-बुजुर्ग और महिलाएं, घर से बाहर निकलने में भी कतराते हैं क्योंकि हर कदम पर गहरे गड्ढे और कीचड़ उनका स्वागत करते हैं। सबसे हृदयविदारक स्थिति उन स्कूली छात्र-छात्राओं की है, जिन्हें अपने सुनहरे भविष्य की इबारत लिखने के लिए हर रोज इन जानलेवा रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।
कई बार साइकिल फिसलने से बच्चों के कपड़े खराब होते हैं और वे चोटिल होते हैं, लेकिन संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखिए कि एक दशक बीत जाने के बाद भी किसी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि को इन नौनिहालों पर रहम नहीं आया। 5 साल पहले जो 'समाज के ठेकेदार' और सफेदपोश नेता हाथ जोड़कर, विकास की गंगा बहाने और एक सुरक्षित भविष्य का सब्जबाग दिखाकर वोट ले गए थे, वे आज एसी कमरों में दुबके बैठे हैं। जनता पूछ रही है कि आखिर किस नैतिक अधिकार और किस मुंह से ये नेता दोबारा उन्हीं मतदाताओं के बीच वोट मांगने आएंगे, जिन्हें इन्होंने पिछले 5 सालों से नारकीय जीवन जीने के लिए छोड़ दिया था? सोहनी की जनता का धैर्य अब जवाब दे रहा है; यह सिर्फ एक सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि उन मासूमों के स्वाभिमान और बुजुर्गों के अधिकार का सवाल है जिन्हें तंत्र की अनदेखी ने हाशिए पर धकेल दिया है। प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अब अपनी कुंभकर्णी नींद तोड़नी होगी, वरना कीचड़ से सने इन रास्तों का गुस्सा आने वाले समय में वोट की चोट के रूप में इनके सिंहासन को हिलाने का दम रखता है।