गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल: चन्दौली के जमालपुर में हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने एक साथ मनाई ईद
चन्दौली (बलुआ): जनपद के बलुआ थाना अंतर्गत जमालपुर (तिरगावां) में आज 'इबादत के साथ मोहब्बत' का एक अनूठा संगम देखने को मिला। ईद-उल-फितर के मुकद्दस मौके पर जमालपुर की बड़ी मस्जिद खुशियों के सैलाब और अटूट भाईचारे की साक्षी बनी। यहाँ त्योहार केवल एक मजहबी रस्म नहीं, बल्कि दिलों को जोड़ने वाला एक उत्सव बन गया।
दुआओं में गूंजा मुल्क की सलामती का स्वर
शनिवार सुबह से ही बड़ी मस्जिद का परिसर सफेद लिबास और रंग-बिरंगी टोपियों से गुलजार रहा। हजारों की संख्या में मुस्लिम भाइयों ने खुदा की बारगाह में सिर झुकाकर नमाज अदा की और देश में अमन-चैन व तरक्की की दुआ मांगी। भीड़ का आलम यह था कि मस्जिद के अंदरूनी हिस्से से लेकर बाहरी परिसर तक तिल रखने की जगह नहीं थी।
नफरत की दीवारें ढही, प्रेम का खिला फूल
इस बार की ईद जमालपुर के लिए खास रही। नमाज संपन्न होते ही जब 'ईद मुबारक' की गूंज फिजां में तैरी, तो क्षेत्रीय हिंदू समाज के लोग बड़ी संख्या में अपने मुस्लिम भाइयों को बधाई देने मस्जिद पहुँच गए।
गले मिलकर दी बधाई: हिंदू-मुस्लिम भाइयों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी।
मिठाइयों से घुली मिठास: साथ मिलकर फोटो खिंचवाई और एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर यह संदेश दिया कि प्रेम के आगे नफरत की हर दीवार बौनी है।
"त्योहार मजहब से नहीं, दिलों से मनाए जाते हैं। जमालपुर की इस एकता ने आज यह साबित कर दिया है।" — स्थानीय निवासी
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस सद्भावपूर्ण आयोजन में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल रहे:
ज्ञानी जैल सिंह यादव (ग्राम प्रधान)
सैयद सरफराज पहलवान
सबलू अहमद
सैयद जावेद अहमद, सैयद सुहेल अहमद
आरिफ जमाल, मोहर्रम अली, कमरुद्दीन खान
मेहनाज खान, सैयद असद, सैयद अनस
अधिवक्ता सैयद जैदी रजा एवं अन्य स्थानीय नागरिक।
बुजुर्गों के आशीर्वाद और बच्चों की किलकारियों के बीच संपन्न हुआ यह जश्न चन्दौली की गंगा-जमुनी तहजीब को और भी गहरा कर गया।