सोने की तस्करी के पारंपरिक धंधे के बाद अब भारतीय तस्करों ने नया ‘गंदा कारोबार’ शुरू कर दिया है। थाईलैंड में गांजे को वैध बनने के बाद हाई-क्वालिटी हाइड्रोपोनिक वीड (गांजा) धड़ल्ले से भारत भेजा जा रहा है। बड़े आर्थिक मुनाफे के लालच में युवा लड़के-लड़कियां अब ‘कैरियर कूरियर’ बनकर इस खेल में कूद पड़े हैं।
लखनऊ और वाराणसी एयरपोर्ट पर पिछले एक साल में दर्जनों मामले सामने आए हैं, जहां कस्टम और डीआरआई की टीमों ने करोड़ों का माल जब्त किया है।थाईलैंड ने 2022 में गांजे को पूरी तरह वैध घोषित कर दिया था। अब बैंकॉक की सड़कों पर खुलेआम हाइड्रोपोनिक गांजा बिकता है। यह खास किस्म का गांजा पानी और खाद के नियंत्रित वातावरण में उगाया जाता है, जिसकी THC मात्रा बहुत ज्यादा होती है। भारत में इसकी एक किलो की कालाबाजारी कीमत 80 लाख से एक करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। तस्कर इसे ट्रॉली बैग, खिलौनों के डिब्बों, फूड पैकेट्स या यहां तक कि वैक्यूम-सील्ड पाउच में छिपाकर लाते हैं।
हालिया मामलों की बात करें तो वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर रविवार को गुजरात के तीन व्यापारियों (एक महिला समेत) को पकड़ा गया। बैंकॉक से आई फ्लाइट में उनके ट्रॉली बैग से 25 किलोग्राम से ज्यादा हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 25 करोड़ रुपये है। इसी तरह लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर अगस्त 2025 में दो यात्रियों से 23.9 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया, कीमत 24 करोड़। डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की ‘ऑपरेशन वीड आउट’ के तहत 2023 से अब तक 300 किलोग्राम से ज्यादा हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त हो चुका है। 2024 में 302 किलो और 2025 के पहले पांच महीनों में ही 373 किलो पकड़ा गया।
जांच में खुलासा हुआ है कि तस्कर बड़े सिंडिकेट का हिस्सा हैं। थाईलैंड में सस्ते दाम पर माल खरीदकर युवा कूरियरों को भेजा जाता है। ये नए-नए लड़के-लड़कियां – ज्यादातर 20 से 30 साल के – एक ही ट्रिप में 5 से 10 लाख तक का मुनाफा कमा लेते हैं।
कस्टम अधिकारियों के मुताबिक, लखनऊ और वाराणसी अब तस्करी के हॉटस्पॉट बन गए हैं
गांजे की तस्करी में कई सिंडिकेट लिप्त है और थाईलैंड से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, जयपुर तक रूट खुल चुके हैं, लेकिन यूपी के एयरपोर्ट पर लगातार पकड़बंदी हो रही है।” एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार आरोपी जेल जा रहे हैं, लेकिन सिंडिकेट के मास्टरमाइंड अभी भी फरार हैं। यह धंधा न सिर्फ युवाओं को बर्बाद कर रहा है, बल्कि देश की नशा-मुक्त भारत मुहिम को चुनौती दे रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर थाईलैंड से आने वाली फ्लाइट्स पर निगरानी और बढ़ाई न गई तो यह समस्या और भयावह रूप ले सकती है। सोने के बाद अब हाइड्रोपोनिक गांजा भारत की सीमाओं को चुनौती दे रहा है – और एयरपोर्ट सुरक्षा एजेंसियां इस ‘नए सोने’ से जूझ रही हैं।